(1) मरीचि के पुत्र कश्यप प्रजापति थे। ब्रह्मदेव की दाहिनी हाथ की बोटे की नली से दक्ष नाम का पुरुष और बाएँ हाथ की बोटे की नली से धरनी नाम की स्त्री जन्मीं। उन दोनों से एक हज़ार-हज़ार महा ऋषि जन्मे। (2) ब्रह्मा के मानस पुत्रों में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंगिरस्‍ु को उद्दध्य, बृहस्पति और संवर्त जैसे पुत्र हुए। बृहस्पति देवताओं के आचार्य बने। (3) मैत्रि (अत्रि) नामक मानस पुत्र से अनेक महा मुनि जन्मे। (4) पुलस्त्य नामक ब्रह्मा के मानस पुत्र से राक्षसों का जन्म हुआ। (5) पुलह नामक मानस पुत्र से किन्नर और किमपुरुष वर्ग उत्पन्न हुए। (6) क्रतू नामक मानस पुत्र से पक्षियों की जाति उत्पन्न हुई।

   
    

Mahabharata - Drona Parva


॥ श्रीः ॥
7.65. अध्यायः 065
Mahabharata - Drona Parva - Chapter Topics
नारदेन सृञ्जयम्प्रति शशिबिन्दुयशोनुवर्णनम्॥ 1 ॥


Mahabharata - Drona Parva - Chapter Text

नारद उवाच। 7-65-0x(4420)(47145)
शशिबिन्दुं च राजानं मृतं सृञ्जय शुश्रुम।
य ईजे विविधैर्यज्ञैः श्रीमान्सत्यपराक्रमः॥ 7-65-1(47146)
तस्य भार्यासहस्राणां शतमासीन्महात्मनः।
एकैकस्यां च भार्यायां सहस्रं तनयाभवन्॥ 7-65-2(47147)
ते कुमाराः पराक्रान्ताः सर्वे नियुतयाजिनः।
राजानः क्रतुभिर्मुख्यैरीजाना वेदपारगाः॥ 7-65-3(47148)
हिरण्यकवचाः सर्वे सर्वे चोत्तमधन्विनः।
सर्वेऽश्वमेधैरीजानाः कुमाराः शाशिबिन्दवाः॥ 7-65-4(47149)
तानश्वमेधे राजेन्द्रो ब्राह्मणेभ्योददत्पिता।
शतंशतं रथगजा एकैकं पृष्ठतोऽन्वयुः॥ 7-65-5(47150)
राजपुत्रं तदा कन्यास्तपनीयस्वलङ्कृताः।
कन्याङ्कन्यां शतं नागा नागेनागे शतं रथाः॥ 7-65-6(47151)
रथेरथे शतं चाश्वा बलिनो हेममालिनः।
अश्वेअश्वे गोसहस्रं गवां पञ्चाशदाविकाः॥ 7-65-7(47152)
एतद्धनमपर्याप्तमश्वमेधे महामस्वे।
शशिबिन्दुर्महाभागो ब्राह्मणेभ्यो ह्यमन्यत॥ 7-65-8(47153)
वार्क्षाश्च यूपा यावन्त अश्वमेधे महामखे।
ते तथैव पुनश्चान्ये तावन्तः काञ्चनाभवन्॥ 7-65-9(47154)
भक्ष्यान्नपाननिचयाः पर्वताः क्रोशमुच्छ्रिताः।
तस्याश्वमेधे निर्वृत्ते राज्ञः शिष्टास्त्रयोदश॥ 7-65-10(47155)
तुष्टपुष्टजनाकीर्णां शान्तविघ्नामनामयाम्। 7-65-11(47156)
शशिबिन्दुरिमां भूमिं चिरं भुक्त्वा दिवं गतः॥ 7-65-11(47157)
स चेन्ममार सृञ्जय चतुर्भद्रतरस्त्वया।
पुत्रात्पुण्यतरस्तुभ्यं मा पुत्रमनुतप्यथाः।
अयज्वानमदक्षिण्यमभि श्वैत्येत्युदाहरत्॥ ॥ 7-65-12(47158)

इति श्रीमन्महाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि षोडशराजकीये पञ्चषष्टितमोऽध्यायः॥ 65 ॥

Mahabharata - Drona Parva - Chapter Footnotes

5-65- त्रयोदशास्त्र निचयाः शिष्टाः॥ 5-65- पञ्चषष्टितमोऽध्यायः॥ 65 ॥


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